Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की

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Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की

Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की| मुड़िया नाम के एक गांव में दो भाई रहते थे। वो हमेशा एक दूसरे से झगड़ते रहते थे। इस वजह से दोनों साथ में नहीं रहते थे। दोनों के घर अलग अलग थे। एक भाई मुरारी लाल बहुत अमीर था और दूसरा भाई बंसी लाल बहुत गरीब था| मुरारी लाल के घर में सब अच्छे अचछे कपड़े पहनते थे, अच्छा अच्छा खाना खाते और हर त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाते थे।

उधर बंसी लाल के घर में एकदम उलटा था| उसके पास अच्छी नौकरी नहीं थी इसलिए घर में कभी पैसे नहीं रहते थे। पैसों की तंगी होने से उसके यहां ना तो किसी के पास पहनने के लिए ढंग के कपड़े थे, ना खाने के लिए भरपेट खाना| मुरारी लाल बहुत आराम की ज़िंदगी जी रहा था और बंसी लाल बहुत कठिनाई भरी जिंदगी जी रहा था| बंसीलाल से अपने परिवार की बुरी हालत देखी नहीं जा रही थी|

Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की| एक दिन उसने अपने भाई मुरारी लाल से मदद मांगने की ठान ली| वो मुरारी लाल के पास गया और बोला, “मुरारी भाई! कैसे हो?” मुरारी लाल बोला, “मैं ठीक हूं, लेकिन तुम यहाँ क्यों आये?” बंसीलाल बोला “मैं बहुत मुसीबत में हूं भाई और मुझे तुम्हारी मदद चाहिए| मुझे कुछ पैसे उधार चाहिए|”

मुरारी लाल बोला, “मैं जानता था, हर बार की तरह आज भी तुम कुछ न कुछ मांगने आये हो|” बंसीलाल उदासी से बोला, “ऐसा मत बोलो भाई, मेरे बीवी बच्चे भूखे हैं, मैं जल्दी तुम्हारे सारे पैसे लौटा दूंगा| मुरारी लाल गुस्से से बोला, “तुम्हारे बीवी बच्चे की मैं क्यूँ फिक्र करूँ, चले जाओ यहां से, मैं तुम्हे एक फूटी कौड़ी भी नहीं दूंगा|” मुरारी लाल ने बंसी लाल को अपने घर से निकाल दिया|

अपने भाई की कठोर बातें सुनकर बंसी लाल उदास होकर अपने घर की ओर जाने लगा| रास्ते में उसने देखा कि एक बहुत बूढ़ा आदमी लकड़ियों का बड़ा गट्ठर उठाने की कोशिश कर रहा था| बंसीलाल अच्छे स्वभाव का था| उससे यह देखा नहीं गया, कि इतना बूढ़ा आदमी अकेले ये वजन उठा रहा है|

Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की

Kids Moral Stories in Hindi

Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की| उसने उनकी मदद करने की सोची और उस बूढ़े आदमी के पास जाकर बोला, “अरे बाबा! रुको मैं आपकी मदद करता हूँ|” बूढ़ा आदमी बोला, “धन्यवाद, मुझसे ये भारी वजन उठाया ही नहीं जा रहा है, अच्छा हुआ तुम आ गये| लेकिन तुम इतने परेशान क्यों दिख रहे हो| बंसीलाल बोला, “नहीं बाबा, कुछ नहीं|” बूढ़ा आदमी बोला, “बेटा तुम मुझे अपनी परेशानी बता सकते हो, शायद मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकूँ|”

यह सुनकर बंसी लाल बोला, “बाबा मैं बहुत गरीब हूँ। बाबा मेरा परिवार भूखा है और मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा हूँ। मैं पैसे भी नहीं कमा पा रहा हूँ। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा कि मैं अपने परिवार का भरण पोषण कैसे करूँ।” यह सुनकर बूढ़ा आदमी बोला, “अच्छा ये बात है, तुम ये लकड़ियों का गट्ठर उठाकर मेरे घर तक पहुँचाने में मेरी मदद करो, तो मैं भी तुम्हारी परेशानी दूर कर सकता हूँ|”

यह सुनकर बंसी लाल हैरानी से बोला, “क्या! सच में चलिए मैं आपकी मदद करूँगा|” बंसीलाल ने वो लकड़ियों का गट्ठर अपनी पीठ पर लादा और धीरे धीरे बूढ़े आदमी के पीछे पीछे उनके घर तक चला गया| घर के बाहर पहुंचकर बूढ़ा आदमी बोला, “इस गट्ठर को यहाँ रख दो बेटा, धन्यवाद! प्रभु तुम्हारी सारी परेशानियाँ दूर करें|”

Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की| फिर वो अपने घर से मीठी रोटी लाया और उसने बंसी लाल को वह रोटी दे दी और बोला, “इस रोटी को लेकर तुम जंगल जाओ काफी दूर जाने पर तुमको आलू बुखारा के तीन पेड़ दिखेंगे उन पेड़ों के पीछे एक छोटा सा पहाड़ है और पहाड़ के ऊपर एक छोटी सी झोपड़ी है, वहाँ तीन बोने रहते हैं और उन्हें मीठी रोटी बहुत पसंद है|

उन्हें ये रोटी देकर बदले में तुम्हे उनसे पैसे नहीं एक पत्थर की चक्की मांगनी है|” बंसीलाल ने उनकी सारी बात बहुत ध्यान से सुनी और मीठी रोटी लेकर वो तुरंत जंगल की ओर निकल पड़ा| बहुत दूर आगे चलने पर उसे वो तीन पेड़ दिखे जो उस बूढ़े आदमी ने बताए थे| उन पेड़ों पर फल रसीले लग रहे थे| बंसीलाल का मन हुआ वहाँ कुछ देर रुक कर फल खाने का, मगर वह उन बोनों के पास जल्दी जाना चाहता था|

उसने अपनी भूख को नजरअंदाज किया और आगे बढ़ता रहा, थोड़ा आगे बढ़ने पर उसे एक पहाड़ दिखा और उस पहाड़ पर एक छोटी सी झोपड़ी| झोपड़ी देखकर बंशी लाल खुश हो गया और फुर्ती के साथ आगे बढ़ने लगा| वह झोपड़ी के अंदर गया उसने वहाँ देखा कि तीन बोने थे| बूढ़े आदमी की बात सच थी| बंसीलाल मन ही मन उस बूढ़े आदमी को धन्यवाद करने लगा|

Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की

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बंसीलाल ने पहले कभी बोने नहीं देखे थे, उन्हें देखकर वह थोड़ा उत्साहित हो गया| वह उन बोने के हाव भाव, उनके कपड़े, उनकी टोपी देखता रह गया और भूल गया कि वह किस काम के लिए आया था| लेकिन बोने उसे देखकर बहुत गुस्सा हुए| लेकिन बंसीलाल अपने उत्साह में उनका गुस्सा देख नहीं पाया| अचानक एक बौना गुस्से से बोला तुम अंदर कहा से आ गये?

Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की| बंसी लाल अचानक उनकी आवाज सुनकर सहम गया और होश में आया और बोला मैं! मैं! मैं! बंसी लाल हूँ|” बोना गुस्से से बोला, “कौन बंसी लाल, हम किसी बंसी लाल को नहीं जानते| तुम जरूर यहाँ कुछ चुराने आए हो| इसे पकड़ कर बांध देना चाहिए|” बंसीलाल बोला, “नहीं! नहीं, मैं कोई चोर नहीं हूं मैं तो ये मीठी रोटी लेकर आया था|” मीठी रोटी देखकर बोने का गुस्सा गायब हो गया|

बोना बोला, “अरे इसके पास मीठी रोटी है| हमें मीठी रोटी बहुत पसंद है| क्या ये तुम हमारे लिए लाए हो?” “हाँ मैं ये आपके लिए ही लाया हूं, लेकिन मैं ये बेचने के लिए लाया हूँ|” बंसी लाल बोला| बोना बोला कोई बात नहीं, “हम इसे खरीद लेंगे, तुम्हे क्या चाहिए इस रोटी के बदले? तुम जो चाहे वो मांग सकते हो|” बंसी लाल बोला, “मुझे इसके बदले पत्थर की चक्की चाहिए|” बोना बोला, “हमें मंजूर है, ये लो चक्की|” इतना कहकर ही बौने के हाथ में चक्की आ गयी| उसने वो चक्की बंसी लाल को दे दी|

Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की| चक्की देने के बाद बोना बोला, “यह कोई मामूली चक्की नहीं है, तुम इससे कुछ भी मांग सकते हो। जब तुम इससे पिसोगे तब ये चक्की तुम्हारी हर इच्छा पूरी करेगी| लेकिन एक बात का विशेष ध्यान रखना, काम हो जाने पर चक्की को एक लाल कपड़े से ढक देना| जिससे ये चक्की रुक जायेगी।” बंसी लाल बोला, “मैं समझ गया| आपका बहुत बहुत धन्यवाद।” खुश होकर बंसी लाल वो चक्की लेकर अपने घर आ गया|

Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की

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घर में उसकी पत्नी और बच्चों का भूख से बुरा हाल था| उसने तुरंत जमीन पर एक कपड़ा बिछाया और चक्की को उस र रखा। उसने अपनी बीवी से लाल कपड़ा लाने को कहा। वो चक्की को घुमाने लगा और बोला, “चक्की! चक्की, मुझे दाल दो|” चक्की इतना बोलते ही चक्की में से दाल निकलने लगी| हाँडी भर दाल मिलने के बाद उसने चक्की को लाल कपड़े से ढक दिया और उस चक्की ने दाल बनाना बंद कर दिया| फिर उसने उसी तरह चक्की से चावल मांगे और चक्की ने बहुत सारे चावल दिए|

चक्की को लाल कपड़े से ढकने के बाद उस दिन उन सबने पेट भर खाना खाया| वो हर दिन अब उस चक्की से नयी नयी चीजें मांगने लगा| कभी आटा, कभी चावल, कभी बाजरा, मसाले, आदि| चक्की उसे हर चीज़ देती रही जो वह मांगता रहा| चक्की से मिली सारी वस्तुओं को लेकर वो बाजार में बेचने लगा| कुछ ही दिन में उसने बहुत सारे पैसे कमा लिए| उसने अपने लिए एक बड़ा घर बनवा लिया|

Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की| अब उसके परिवार के पास सब कुछ था| खाने के लिए भरपेट खाना और पहनने के लिए अच्छे कपड़े| सभी बहुत खुश थे| लेकिन उनकी ये खुशी एक इंसान से देखी नहीं जा रही थी| मुरारीलाल को उसकी खुशी देखकर जलन होने लगी| मुरारी लाल सोचने लगा, “कुछ दिन पहले तो ये मेरे पास उधार पैसे मांगने आया था, अब इतनी जल्दी ये अमीर कैसे हो गया? इसका पता तो लगाना पड़ेगा| ज़रूर कोई चक्कर है|”

ऐसा सोचकर वह एक दिन अपने भाई बंसी लाल के घर में चुपके से घुस गया| थोड़ी ही देर में उसे चक्की के बारे में पता चल गया| अगले ही दिन उसने उस जादुई चक्की को चुरा लिया और अपने परिवार के साथ गाँव छोड़ने की ठान ली| चक्की लेकर वह गांव से निकल पड़ा| वहाँ पास ही एक सागर था, जो उसे पार करना था| वह सभी नाव में बैठकर सागर पार करने लगे| बीच रास्ते में ही उसने उस चक्की को चलाना चाहा। उसने उस चक्की को चलाया और अपनी इच्छा प्रकट करी, “चक्की! चक्की, मुझे नमक दो, चक्की।” फिर क्या था, चक्की ने नमक निकालना शुरू कर दिया|

Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की| उस चक्की से नमक निकलता रहा और नाव बहुत भारी हो गयी। अपने लालच के चक्कर में मुरारी लाल ने उस चक्की को बंद करने का तरीका ही नहीं देखा था। अब वो चक्की घूमती रही और उस से नमक निकलता रहा| नमक के भार से नाव उस सागर में डूब गई और मुरारी लाल का पूरा परिवार उस सागर में डूब गया। फिर भी उस चक्की से नमक निकलना बंद नहीं हुआ| आज भी चक्की से नमक निकल रहा है| शायद इसीलिए सागर का पानी खारा हो गया है। Kids Moral Stories in Hindi – जादुई चक्की|

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